आजमगढ़ में करारी हार के बाद सपा समर्थकों में दिखी नाराजगी, एक-दूसरे पर साधा निशाना

आजमगढ़ में उपचुनाव में दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ की जीत के बाद उनके कई बयान और वीडियो चर्चाओं में हैं। इस बीच चर्चाएं सपा की हार और अभेद किले में हुई पराजय की भी हो रही है। आजमगढ़ के वासी बताते हैं कि अखिलेश के गढ़ ‘आजमगढ़’ में जब निरहुआ वोट मांग रहे थे तो उन्होंने कहा था कि ‘दुइए बरिस का मौका ह… एह बारी जिता दे, अगर नीक ना करब त हरा दिहा लोगन…’ माना जा रहा है कि निरहुआ की जीत में इस बयान का अहम योगदान रहा है। इस वादे पर ही उनकी जीत की पूरी स्क्रिप्ट लिखी गई है।

हालांकि इस बीच सपा समर्थक भी सोशल मीडिया पर जमकर स्क्रिप्ट लिख रहे हैं। इस स्क्रिप्ट में हार पर मंथन जारी है। कुछ इसके लिए अखिलेश यादव को जिम्मेदार मान रहे हैं तो कुछ लोग पार्टी में भीतरखाने की फूट को। हालांकि इन सब के बीच समर्थक जाति बिरादरी के आधार पर भी हार जीत के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसको लेकर काफी ज्यादा विवाद चल रहा है। इस बीच कुछ लोग निरहुआ को भी यादव बताकर इसे अपनी जीत बताते हुए चुटकी ले रहे हैं।

फेसबुक पर एक यूजर इस चुनाव परिणाम के सामने आने के बाद लिखते हैं कि, ‘यादव सेना के वीरों को ही समाजवादी पार्टी की कमान दे देनी चाहिए। क्योंकि अब उनकी नजर में सभी बिरादरी गद्दार है और मुस्लिम तो ओवैसी परस्त हो गया है।’
एक अन्य फेसबुक पोस्ट में लिखा गया कि, ‘पार्टी में रहकर मुस्लिम हित की बात करने पर एक यादव सेना के वीर ने मुझे ही मलाई खाने वाला बता दिया। वैसे वो बताए पद और मलाई कितनी आज तक मिली है मुझे या मेरे जैसे किसी आम कार्यकर्ता को।’

‘मुस्लिम भाई वोट दिए या ना दिए इसपर विचार करने से पहले सोचिए की आपने कितने नए लोगो को पार्टी में सम्मान दिया और जोड़ा?🤔 क्या 100% यादव वोट सपा को मिला?🤔 समीक्षा इस पर भी हो।’

सपा की हार के बाद ट्विटर पर अनिल कुमार लिखते हैं कि, ‘रोना इस बात का नही कि आजमगढ हार गए, रोना इस बात का है जिस भाजपाई ने हराया वह भी यादव है। अब खतरा यह है कि आजमगढ की हमारी यादव अगर प्रजा भाजपाई यादव से जुड़ गई तो आजमगढ हमारी जागीर से हमेशा के लिए बाहर हो जाएगा #निरहुआ वहां हमारी प्रजा के बीच मौजूद रहेगा और विकास भी कराएगा’

 

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