जेटली का राहुल पर वार, कहा पिता जैसी गलती न करें




नई दिल्ली। अल्पसंख्यक अधिवेशन में तीन तलाक को खत्म करने की बात करने वाली कांग्रेस पार्टी पर अमेरिका में इलाज करा रहे बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली ने करारा हमला किया है। जेटली ने ब्लॉग लिखते हुए बरेली में हुई निकाह-हलाला की एक घटना को देश के विवेक को झकझोरने वाला बताया। इसके साथ ही उन्होंने इसे कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए राजनीतिक अवसरवादिता करार दिया।
जेटली ने लिखा, ‘पर्सनल लॉ के नाम पर अन्याय को बढ़ावा देने वाली ऐसी घटनाएं बहुत आम हैं। कई समुदायों ने पिछले एक दशक में अपने पर्सनल लॉ में प्रगति के लिए बड़े बदलाव किए हैं। सदियों तक कुछ रूढ़िवादी और अन्यायपूर्ण प्रथाएं देश में चलती रहीं, लेकिन उन्हें खत्म किया गया। सती और अस्पृश्यता जैसी प्रथाएं आज असंवैधानिक हैं।’ उन्होंने लिखा, ‘बरेली से हाल ही में निकाह-हलाला का ऐसा केस आया है, जिसने मेरी अंर्तचेतना को झकझोर दिया। इस्लामिक पर्सनल लॉ में मौजूद निकाह-हलाला की प्रथा कितनी रूढ़िवादी है, यह सोचने की जरूरत है। 2009 में एक महिला की शादी हुई और तीन तलाक के जरिए 2011 और 2017 में उसे तलाक दिया गया। महिला को फिर अपनाने के लिए उसे 2 बार निकाह-हलाला की प्रथा से गुजरना पड़ा। पहली बार अपने ससुर के साथ और दूसरी बार अपने पति के भाई के साथ। दोनों ने ही महिला का बलात्कार किया। इसी तरह का एक केस पीटीआई ने 2 सितंबर 2018 को उत्तर प्रदेश के संभल जिले से रिपोर्ट किया था।’
जेटली ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए मार्मिक टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, ’21वीं सदी में विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में किसी महिला की गरिमा के साथ ऐसा खिलवाड़ हर शख्स के लिए शर्म से गड़ जाने की बात है। बरेली की इस महिला का बलात्कार उसके ही परिवार के 2 पुरुषों ने किया और फिर दोनों ने महिला को तीन तलाक दिया। अगर भारत में ट्रिपल तलाक एक आपराधिक कृत्य होता तो क्या महिला के सम्मान के साथ ऐसा खिलवाड़ हो सकता था? बरेली की इस महिला के साथ जानवरों से भी अधिक बुरा बर्ताव हुआ है।’ जेटली ने लिखा, ‘दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस और राहुल गांधी ट्रिपल तलाक के लंबित बिल को सरकार बनने पर वापस लाने की बात कर रही है। इतिहास खुद को दोहरा रहा है, ऐसी ही गलती राजीव गांधी ने शाह बानो के केस में की थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर राजीव गांधी ने शाह बानो को त्रासदी और शोषण के गर्त में ढकेल दिया, 32 साल बाद उनके पुत्र भी मुस्लिम महिलाओं को यातना के शिविर में लौटाना चाहते हैं।’




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