बसंत पंचमी क्यूं और कैसे मनाई जाती है, जानिये   

बसंत पंचमी के दिन विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की विशेष उपासना की जाती है। अगर कुंडली में विद्या बुद्धि का योग नहीं है या शिक्षा की बाधा का योग है तो इस दिन विशेष पूजा करके उसको ठीक किया जा सकता है। इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था इसके साथ ही कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन ही ब्रह्मांड की रचना हुई थी। मां सरस्वती ने जन्म के पश्चात सभी को वाणी दी थी। इस दिन आप कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। बसंत पंचमी के दिन से बसंत ऋतु की भी शुरूआत होती है। बसंत ऋतु मौसमों का राजा माना जाता है। कड़ाके की सर्दी के बाद यह सुहाना मौसम शुरू होता है इस मौसम में न तो चिलचिलाती धूप होती है और ना ही कड़ाके की सर्दी। बसंत ऋतु में पेड़-पौधों पर ताजे फल और फूल खिलते हैं। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। सूर्य की पीली किरणें इस बात का प्रतीक हैं कि सूर्य की तरह प्रखर और गंभीर बनना चाहिये। सबसे अनोखी बात इस दिन से ब्रज में होली का आगाज़ हो जाता है। तो दूर-दराज से श्रद्धालु बसंत पंचमी के दिन बांके बिहारी मंदिर में होली खेलने के लिये भी आते हैं।

इस तरह करें मां सरस्वती की पूजा

आज के दिन पीले, बसंती या सफेद वस्त्र धारण करें, काले या लाल वस्त्र बिल्कुल ना पहनें.

पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा की शुरुआत करें.

मां सरस्वती को श्वेत चन्दन और पीले तथा सफ़ेद पुष्प अवश्य अर्पित करें.

प्रसाद में मिसरी,दही,पीले मीठे चावल या कोई पीली मिठाई मां सरसस्वता को समर्पित करें.

मां सरस्वती के मूल मंत्र “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का जाप करें.

जाप के बाद प्रसाद सभी में वितरित कर खुद भी ग्रहण करें.

इन उपायों को करने से होंगी समस्यायें दूर

जिन लोगों को एकाग्रता की समस्या है ,वे आज से नियमित रूप से प्रातः सरस्वती वंदना का पाठ करें.

मां सरस्वती के चित्र की स्थापना करें ,इसकी स्थापना पढ़ने के स्थान पर करना श्रेष्ठ होगा.

मां सरस्वती का बीज मंत्र भी लिखकर टांग सकते हैं.

जिन लोगों को सुनने या बोलने की समस्या है वे लोग सोने या पीतल के चौकोर टुकड़े पर माँ सरस्वती के बीज मंत्र “ऐं” को लिखकर धारण कर सकते हैं.

 

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