सांसद नुसरत जहां के पूजा करने पर इनको हुई आपत्ति पर अखाड़ा परिषद ने पूछा- सलमान खान भी तो करते हैं आरती




तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद नुसरत जहांने दुर्गा पूजा पंडाल में अपने पति निखिल जैन के साथ पूजा अर्चना की. नुसरत जहां के पूजा-अर्जना करने पर देवबंदी उलेमा ने आपत्ति जताई है. वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने देवबंद के उलेमाओं की आपत्ति को गलत बताया है.

इलाहाबाद. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद नुसरत जहां एक बार फिर सुर्खियों में हैं. नुसरत जहां ने दुर्गा पूजा पंडाल में अपने पति निखिल जैन  के साथ पूजा अर्चना की. इसकी तस्वीरें सोशल मीडियो पर वायरल हो रही हैं. उधर नुसरत जहां के पूजा-अर्जना करने पर देवबंदी उलेमा नाराज हो गए हैं. उलेमा ने नुसरत जहां को अपना नाम बदलने की नसीहत दी है. उलेमा का कहना है कि नुसरत जहां मुसलमानों और इस्लाम को बदनाम कर रही हैं. वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने टीएमसी सांसद नुसरत जहां की दुर्गा पूजा पंडाल में जाने और पूजा अर्चना करने को लेकर देवबंद के उलेमाओं की आपत्ति को गलत बताया है.

‘इस्लाम और हिन्दू धर्म कभी किसी के बदनाम करने से बदनाम नहीं हो सकता है’

नरेंद्र गिरि ने कहा है कि देश का कोई भी नागरिक मंदिर में पूजा अर्चना करने आ सकता है. उन्होंने कहा है कि फ़िल्म स्टार सलमान खान भी भगवान की आरती और पूजा करते हैं, आखिर तब उनका कोई विरोध क्यों नहीं करता है? महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा कि इस्लाम को बदनाम करने की बात गलत है. इस्लाम और हिन्दू धर्म कभी किसी के बदनाम करने से बदनाम नहीं हो सकता है.

 

narendra giri

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने टीएमसी सांसद नुसरत जहां के पूजा करने पर उलेमा की आपत्ति पर सवाल उठाए हैं.

नाराज देवबंदी उलेमा ने कहा- क्यों गैर मजहबी काम कर रही हैं?

बता दें नुसरत जहां से नाराज देवबंदी उलेमा ने कहा कि वह क्यों गैर मजहबी काम कर रही हैं? इस्लाम में अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करना हराम है. अगर नुसरत जहां को गैर मजहबी काम करने हैं, तो क्यों नहीं अपना नाम बदल लेती हैं. इस तरह के काम करके नुसरत जहां इस्लाम और मुसलमानों की क्यों तौहीन कर रही हैं.

इत्तेहाद उलेमा ए हिंद के उपाध्यक्ष मुफ्ती असद कासमी ने कहा, ”नुसरत जहां ने इस तरह कोई पहली बार पूजा नहीं की है, इससे पहले भी वो पूजा करती रही हैं. इसी अमल को दोहराते हुए उन्होंने इस बार भी नव दुर्गा की पूजा की है. मैं समझता हूं कि इस तरह का अमल इस्लाम के अंदर बिल्कुल जायज नहीं है. इस्लाम इस चीज की इजाजत नहीं देता है कि अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत की जाए किसी और की पूजा की जाए. यह इस्लाम के अंदर हराम है.”

मुफ्ती असद कासमी ने कहा, ”देखिए मैं तो उनको यही मशवरा देता हूं कि जब वह इस्लाम को नहीं मानती हैं. इस्लाम के ऊपर अमल नहीं कर रही हैं. सारे काम गैरमजहबी कर रही हैं, उन्होंने शादी भी की तो गैर मजहब में. मैं उनको मशवरा देता हूं कि वह अपना नाम भी बदल लें, क्यों इस्लाम को बदनाम करती हैं. इस तरीके के नाम रखकर मुसलमानों की और इस्लाम की तौहीन क्यों कर रही हैं.”




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