वाराणसी: पीएम नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उतरे 101 प्रत्याशी, चुनाव आयोग की बढ़ी मुश्किलें




नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट वाराणसी पर इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। 29 अप्रैल को नामांकन के आखिरी दिन तक कुल 102 प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया, इनमें नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। प्रत्याशियों की इतनी बड़ी लिस्ट देखकर जिला प्रशासन और चुनाव आयोग के अधिकारियों के हाथ-पैर फूल रहे हैं। जानकारी के अनुसार अगर नाम वापसी तक यह संख्या 64 तक नहीं पहुंचती तो इस सीट पर बैलट पेपर से मतदान करवाना चुनाव आयोग की मजबूरी होगी।

नामांकन के आखिरी दिन जिन लोगों ने नामांकन किया, उनमें से प्रमुख रूप से गठबंधन प्रत्याशी व बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव, कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय, सपा की शालिनी यादव, प्रख्यात हॉकी खिलाड़ी व पद्मश्री मो. शाहिद की बेटी हिना शाहिद शामिल रहीं. निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अतीक अहमद का पर्चा उनके भतीजे शहनवाज आलम ने दाखिल किया. इसके अलावा तेलंगाना से आए हल्दी किसानों के प्रतिनिधि कुंटा गंगाराम मोहन रेड्डी के साथ कई अन्य किसानों ने पर्चा दाखिल कर सियासत को गर्मा दिया है.

अंतिम दिन पर्चा दाखिल करने वालों में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सुरेंद्र, रामराज्य परिषद श्रीभगवान पाठक, राष्ट्रीय बंधुत्व पार्टी से जम्मू के छज्जू राम गुप्ता, फिरोजाबाद की प्रीति मिश्रा, भारती ने इंसाफवादी पार्टी से मिर्जापुर के जय प्रकाश, लोकप्रिय समाज पार्टी से रोहनिया के छेदीलाल समेत कुल 71 लोग शामिल हैं.

बता दें 2 मई तक नाम वापसी का आखिरी दिन है. अब सभी की निगाहें इसी बात पर टिकीं हैं कि कितने उम्मीदवार अपना नाम वापस लेते हैं और किनका-किनका नामांकन ख़ारिज होता है. अगर प्रत्याशियों की संख्या 64 से ज्यादा रही तो मतदान बैलट पेपर से होगा क्योंकि एक ईवीएम में 16 प्रत्याशियों के ही नाम होते हैं. साथ ही चार यूनिट ईवीएम ही लगाई जा सकती हैं.

यही वजह है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नामांकन के आखिरी दिन वाराणसी में पार्टी कार्यकर्ताओं से गहन मंत्रणा की. उन्होंने प्रत्याशियों की अधिक संख्या को देखते हुए चुनाव की अलग से रणनीति पर चर्चा भी की.




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