मशहूर ‘लेडी बॉन्ड’ रजनी पंडित अब चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियों के लिए कर रही है जासूसी




नई दिल्ली। एक समय में कई मर्डर मिस्ट्रीज सॉल्व करने वाली और कई धोखेबाज मंगेतरों को सबक सिखाने वाली भारत की मशहूर ‘लेडी बॉन्ड’ रजनी पंडित अब चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियों के लिए जासूसी कर रही हैं. भारत की पहली महिला जासूस के तौर पर मशहूर रजनी ने 22 साल की उम्र में ही पहला केस सुलाझाय था. रजनी के पिता सीआईडी में थे इसलिए काफी छोटी उम्र में ही उन्होंने जासूसी के गुर सीख लिए थे।

लोकसभा चुनाव 2019 में पंडित और उनके जैसे अन्य कई लोगों की हाई डिमांड है ताकि एक राजनीतिक दल विपक्षी दल पर आरोप लगा सकें और इसके जरिए अपने प्रत्याशी की मदद कर सकें. मुंबई निवासी पंडित ने एएफपी को बताया, ‘यह गोपनीय है लेकिन जब भी कोई पार्टी अपने उम्मीदवारों या विपक्षी उम्मीदवार में से किसी एक को संदिग्ध पाती है तो हमें उनसे जांच करने के लिए कहती है.’

57 वर्षीय पंडित ने बताया कि ‘हमसे यह भी कहा जाता है कि उम्मीदवारों के पास कितने पैसा है और वह कैंपेन के लिए पैसे कहां से लाए हैं. हम ऐसे कामों के दौरान बहुत ही लो प्रोफाइल रहते हैं.’ पंडित का कहना है कि उनकी टीम जनवरी से राजनीतिक दलों में खुद को ‘एकीकृत’ करने में व्यस्त हैं. वे फाइनेंस के मामले देख रही हैं और क्लाइंट्स को रिपोर्ट देने से पहले रैलियों में भी जाती हैं.

उन्होंने कहा, ‘आम तौर पर चुनावों से पहले मामलों में वृद्धि होती है. हमारे पास बहुत सारे आवेदन आए लेकिन हम कुछ को ही स्वीकार कर पाए.’ इंडियाज एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट डिटेक्टिव्स एंड इन्वेस्टिगेटर्स के अध्यक्ष कुंवर विक्रम सिंह ने कहा, ‘बहुत अधिक मेहनत करनी होती है.’ सिंह ने एएफपी को बताया, ‘(एक उम्मीदवार की) स्थानीय प्रतिष्ठा, प्रभाव, उसकी अपनी जाति में उसका रुख … इन सभी बातों पर गौर किया जाता है.’

 


महाराष्ट्र में पैदा हुई और यहीं पली-बढ़ीं देसी ‘शर्लोक होम्स’ रजनी का दावा है कि अब तक उन्होंने 80 हजार से ज्यादा केस सुलझाए हैं. उन्होंने ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’, जो जीवन की सच्ची घटनाओं को छापता है, को अपने इस सफर के शुरूआत के बारे में बताया. साथ ही अपने एक खास केस के बारे में भी जिक्र किया कि क्यों वो उनके जासूसी जीवन के यादगार लम्हों में शामिल है.

उन्होंने कहा, ‘मैं कॉलेज में थी जब मैंने अपना पहला केस सॉल्व किया था. मैं फर्स्ट इयर में पार्ट टाइम ऑफिस क्लर्क का काम करती थी. इस दौरान मेरे साथ काम करने वाली एक महिला ने मुझे अपने घर हुई चोरी के घटना के बारे में बताया. उसे अपनी नई बहू पर शक था लेकिन उसके पास इसके कोई सबूत नहीं थे.’

अपने पिता से प्रभावित होकर रजनी ने इसे अपने पहले केस के तौर पर सॉल्व करने का निर्णय लिया. उन्होंने महिला के घर से लगी सड़क पर नजर रखनी शुरू की. तो मैंने पाया कि उनका बेटा ही असली चोर है. जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने चोरी की बात क़ुबूल कर ली. इसके बाद यहीं से मेरे करियर की शुरुआत हो गई. उस वक्त मैं सिर्फ 22 साल की थी.’

उस जमाने में न इंटरनेट था और न सोशल मीडिया, ऐसे में रजनी अपनी तफ्तीश के लिए पूरी तरह से लोगों से पूछताछ पर निर्भर रहती थीं. इस पेश में मौजूद खतरे के बावजूद वो मजबूती से इसमें आगे बढ़ती रहीं.

रजनी ने कहा, ‘यह मुश्किलों से भरा काम है. शुरुआत में मेरे माता-पिता को इसके बारे में पता नहीं था. पर जब मेरे पिता को पता चला, उन्होंने मुझे याद दिलाया कि यह पेशा बेहद खतरनाक है. पर जब वो इसे कर सकते हैं तो, मैं भी. इसलिए मैं इस काम में जुटी रही. मुझे अपने काम से प्यार हो गया था इसलिए शादी और परिवार के बारे में सोचने का वक्त नही मिला.

रजनी के काम पर मीडिया की नजर तब पड़ी जब उन्होंने एक मर्डर केस को सुलझाने के लिए नौकरानी (मेड) के रूप में 6 महीने तक काम किया. यह उनके लिए सबसे मुश्किल केस साबित हुआ था.

उन्होंने कहा, ‘मेरा सबसे कठिन मामला हत्या की तफ्तीश के लिए सबूत जुटाना था. महिला के पति और बेटे दोनों की हत्या कर दी गई थी, मगर वारदात को किसने अंजाम दिया उसका पता नहीं चल पा रहा था. मैं इसका सुराग तलाशने के लिए महिला के घर में 6 महीने तक नौकरानी बनकर रही जिस पर हत्या का संदेह था.’

रजनी ने बताया कि, ‘जब वो (महिला) बीमार पड़ गई, तो मैंने उसका ख्याल रखा और धीरे-धीरे उसका भरोसा हासिल किया. मगर एक बार जब घर में खामोशी पसरी थी मेरे रिकॉर्डर से ‘क्लिक’ की हल्की सी आवाज आई. तब उसे मुझपर शक होने लगा. वो मुझे बाहर जाने से भी रोकने लगी थी.’




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