मथुरा के एटीएम में या तो कैश नहीं है या वह खराब पड़े हैं

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मथुरा। शहर के 70 फीसदी एटीएम में या तो कैश नहीं है या वह खराब पड़े हैं। नोटबंदी के बाद यह दूसरी मर्तबा है जब शहर को कैश की कमी से जूझना पड़ रहा है। कैश की किल्लत का असर मंगलवार को जिले में भी दिखाई दिया। पड़ताल की गई तो पाया कि शहर में संचालित कुल 230 एटीएम में से करीब अस्सी प्रतिशत एटीएम कैश ना होने के कारण बंद पड़े हैं।
बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, तेलंगाना आदि राज्यों सहित उप्र में भी एटीएम में कैश की समस्या सामने आ रही है। मंगलवार को शहर के होली गेट, डीग गेट, भूतेश्वर, कृष्णा नगर, स्टेट बैंक चौराहा, बस स्टैंड व महोली रोड पर लगे एटीएम में से करीब अस्सी प्रतिशत एटीएम बंद पाए गए। एटीएम पर या तो लिखा था दिस एटीएम इज आउट ऑफ सर्विस या फिर बोर्ड लगा था कि मशीन खराब है। हालांकि स्टेट बैंक चौराहे पर दो मशीनें चालू हालत में जरूरी मिलीं लेकिन इनसे दो हजार के नोट गायब थे। यहां सिर्फ पांच सौ के नोट ही लोगों को मिल पा रहे थे। बस स्टैंड के समीप स्थित आइसीआइसीआइ के एटीएम में कैश नहीं था तो ठीक इसके बराबर में लगे बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम में टैक्निकल खराबी बताई गई। मौके पर इंजीनियर इसे सही करने में लगे थे। नेपाल होटल पर लगा इंडिकेश का एटीएम चालू हालत में मिला लेकिन इसके बराबर में लगे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम पर मशीन खराब होने का बोर्ड लगा था। इस संबंध में लीड बैंक मैनेजर पीके शर्मा ने बताया कि एटीएम क्यों बंद है, इसकी जानकारी सिर्फ बैंक ही बता सकते हैं। हो सकता है कोई टेक्निकल समस्या रही हो। वे तो सिर्फ माध्यम है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने इस परेशानी से निपटने के लिए आपातकालीन बैठक भी बुलाई है। साथ ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। वहीं राहुल गांधी ने इस पर चुटकी लेते हुए ट्वीट किया है कि समझो अब नोटबंदी का फरेब, आपका पैसा नीरव मोदी की जेब। सरकार ने इस कमी का कारण कुछ इलाकों में अचानक बढ़ी खपत को माना है। शहर के किसी भी एटीएम में पैसा नहीं है, अचानक इस प्रकार की कैश की कमी से नोटबंदी के वहीं दिन याद आने लगे हैं जिसके लिए सिर्फ दो हजार रुपये लेने की चाह में घंटों तक लाइन में लगना पड़ा था।
सागर सविता, ग्राहक। अधिकांश एटीएम खराब पड़े हैं। जहां मशीन चल भी रहीं है तो भीड़ बहुत ज्यादा है। यहां नम्बर आना मुश्किल है। अब तो लगता है कि आज कैश नहीं मिल पाएगा। अब तो घर जाने में ही सार दिख रहा है।
चिराग अग्रवाल, ग्राहक।

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